जोधपुर: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर के चिकित्सकों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 59 वर्षीय मरीज के शरीर से 20.8 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। करीब साढ़े आठ घंटे तक चली इस जटिल और उच्च जोखिम वाली सर्जरी को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अंजाम दिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, यह राजस्थान में अब तक ऑपरेशन के जरिए निकाले गए सबसे बड़े ट्यूमर में से एक माना जा रहा है।
मरीज के पेट से निकाले गए ट्यूमर का आकार 44×37×24 सेंटीमीटर बताया गया है। चिकित्सकों के मुताबिक, इतने बड़े आकार के ट्यूमर के मामले दुनिया भर में भी बेहद कम देखने को मिलते हैं।
एक साल से दर्द और भारीपन की समस्या से जूझ रहा था मरीज
जानकारी के अनुसार, मरीज का वजन करीब 160 किलोग्राम था और वह पिछले लगभग एक वर्ष से पेट में लगातार भारीपन और तेज दर्द की शिकायत से परेशान था। जांच के दौरान डॉक्टरों को पेट के पिछले हिस्से में एक विशाल गांठ दिखाई दी। चिकित्सकीय भाषा में इसे रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर कहा जाता है।
प्रारंभिक जांच में इस गांठ के कैंसरग्रस्त होने की आशंका भी जताई गई थी, जिसके बाद विशेषज्ञों ने विस्तृत परीक्षण कर सर्जरी का निर्णय लिया।
ट्यूमर से चिपकी हुई थी दाईं किडनी
ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तब आई जब पता चला कि ट्यूमर मरीज की दाईं किडनी से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। ऐसे में मरीज की जान बचाने और ट्यूमर को पूरी तरह निकालने के लिए सर्जिकल टीम को ट्यूमर के साथ दाईं किडनी भी निकालनी पड़ी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की सर्जरी में रक्तस्राव, अंगों को नुकसान और अन्य जटिलताओं का खतरा काफी अधिक होता है, इसलिए पूरे ऑपरेशन को अत्यंत सावधानी के साथ अंजाम दिया गया।
साढ़े आठ घंटे तक चला ऑपरेशन
इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी का नेतृत्व डॉ. सत्य प्रकाश मीणा ने किया। ऑपरेशन करीब 8 घंटे 30 मिनट तक चला, जिसमें कई विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मिलकर काम किया। डॉक्टरों की टीम ने लगातार समन्वय बनाए रखते हुए सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।
कई विभागों के विशेषज्ञों ने निभाई अहम भूमिका
इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में जनरल सर्जरी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थीसियोलॉजी विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने संयुक्त रूप से योगदान दिया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बहु-विषयक चिकित्सा टीम की सामूहिक मेहनत और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन संभव हो सका।
एम्स प्रशासन ने दी टीम को बधाई
एम्स जोधपुर के निदेशक प्रो. (डॉ.) गोवर्धन दत्त पूरी ने इस उपलब्धि पर डॉक्टरों की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता संस्थान की उन्नत चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञता और विभिन्न विभागों के बीच उत्कृष्ट तालमेल का परिणाम है।
क्या होता है ट्यूमर?
ट्यूमर शरीर में कोशिकाओं की असामान्य या अनियंत्रित वृद्धि से बनने वाली गांठ होती है। सामान्य रूप से शरीर में पुरानी कोशिकाएं नष्ट होती रहती हैं और उनकी जगह नई कोशिकाएं बनती हैं। लेकिन जब यह प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो अतिरिक्त कोशिकाएं जमा होकर गांठ का रूप ले लेती हैं, जिसे ट्यूमर कहा जाता है। यह कैंसरयुक्त भी हो सकता है और गैर-कैंसरयुक्त भी।
